कोयल कूक रही है मद में
बौर लगे हैं आम की डार।
बगिया महक रही फूलों से
चिड़िया गाएँ राग बहार।
सूरज से आभा चोरी कर
टेसू धधक रहा है लाल।
भंवरा फूलों के कानों में
चुगल राह फूलों का रास।
मैने भी एक बात सुनी
निकला था देश से राजकुमार।
उसके साज का जादू सुन
ये नाच रहा पूरा उद्यान।
ठूँठ बिरानी दुनिया में
रौनक का आया है उपहार।
सुर्ख वसंती चूनर ओढ़े
खूब सजा है ये संसार।
रुचि शुक्ला
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