राह की सीख
दिन के उजाले में
सच कभी छुपता नहीं।
पर बिन अंधेरे
तारे ज़मीं से दिखते नहीं।
कुदरत के इन
इशारों को
बड़ी तरतीब से समझा।
नज़ाकत से
इन फंदों को
ज़रा सा खोल कर जाना।
आसां नहीं
मुश्किल है ये
छुपी सी
कई कहानी हैं।
इस सोंच की
सीमा के
उस पार भी कुछ है।
कुछ है, जो छुपा है
क्या?, ये मालूम नहीं
कई छोर हैं
कई... पहलू
सच पूरा
कभी कहीं से
दिखता नहीं।
रुचि शुक्ला।