चलो साथ चलें पुरानी यादों में भटकने की क्या जरूरत है
चलो; अभी आज कुछ करें और साथ चलें
कल के चक्कर में पड़ने से बेहतर है
मन भर कर दिल की बात करें
माना अब चाँद शर्माता नहीं है
मगर चाँदनी रात में
आज भी मन गुदगुदाता है
कभी चलो साथ, और देखो
ये जहाँ बिल्कुल भी बदला नहीं है।
तुम्हें पता है
बादल आज भी संदेशे लाते हैं
बारिश की बूँदों के साथ
खुशियाँ बरसती हैं
सिर्फ तुम हाथ नहीं बढ़ाते
और उन प्यार भरे संदेशों के लिफ़ाफ़े
बिनखुले ही रह जाते हैं
माना वक्त के साथ कुछ बदल गया है
मगर लोग वही हैं
दोस्ती की चाह वही है
कहने और सुनने का मज़ा वही है
भर तकिया बाहों में किसी के साथ बैठो
चंद लम्हें किसी को देकर तो देखो
दुनिया आज भी बदली नहीं है।
क्यों कैद कर रखा है
और एक बुलबुले में रहते हो
इस छोटी सी दुनिया का विस्तार
और रंग तुम्हें आज भी
रोमांच से भर देंगे
आओ चलो देखो
दुनिया आज भी बदली नहीं है।
रुचि शुक्ला...