क्या संदेशा लाया है
ए बादल तू सीने में क्या छिपा के लाया है
ऐसा क्या संदेशा है
जो उसने भिजवाया है
चिड़िया चहक रहीं हैं इतनी
वो भी कुछ तो बोल रही हैं
क्या तूने इनके कानों में
दिल का राज़ बताया है
ए बादल तू सीने में क्या छिपा के लाया है।
पानी की रिमझिम ये बूंदें
सुरमयी बोली बोल रही हैं
तेज़ हवा का झोंका जैसे
दिल में मिश्री घोल रहा है
क्या तूने इनके कानों में
दिल का राज़ बताया है
ए बादल तू सीने में क्या छिपा के लाया है।
चन्दा मामा लुकछुप कर यूँ
क्या इशारा करते हैं
तेरी ओट से झाँक ये तारे
बार-बार कुछ कहते हैं
क्या तूने इनके कानों में
दिल का राज़ बताया है
ए बादल तू सीने में क्या छिपा के लाया है।
मैं तो हूँ नन्हा सा बालक
उल्टा-पुल्टा क्या जानूँ
ऐसा-वैसा कहने से तो
सीधे ये बतला दे तू
क्या तूने इनके कानों में
दिल का राज़ बताया है
ए बादल तू सीने में क्या छिपा के लाया है।
-रुचि शुक्ला
यह कविता YouTube पर सुनने के लिए please visit https://youtu.be/wThPLlYlSkA





