Wednesday, 13 March 2024

किसान

 


                     किसान

भारत एक कृषि प्रधान देश है

निबंध का पहला वाक्य

याद है ना

भूलना नहीं

दो जून की रोटी के बिना 

राजा और रंक एक ही हैं

देश के लहलहाते खेत

किसीने अपने पसीने से सींचे है

पूस की रात में ठिठुरता हल्कू

कड़कती धूप में हल चलाता सुजान भगत

वही हैं 

जिनकी बदौलत 

आत्मनिर्भर होने का दम भरते हो

ये वही हैं जो 'जय जवान, जय किसान' का नारा नहीं लगाते

इनके पूत सीमा को अपने खून से सींचते हैं

और मिट्टी को अपनी देह का नमक दे 

उर्वरक बनाते हैं

कर्ज में डूबा देश का ये किसान वही है

जिसका ऋण हम दबाए बैठे हैं...

                         रुचि शुक्ला

Tuesday, 12 March 2024

गाँव

                               

    
                          गाँव

गाँव शहर हो गए 

और पड़ोस अजनबी

विश्व गाँव बन गया

और हम वैश्विक 

दूरियाँ नहीं रहीं

पर नजदीकियाँ मिट गईं

कसम से मगर, 

चौपाल तो आज भी सजती है

बस रंगत बदल गई...

                        रुचि शुक्ला